रजत शर्मा प्रोपागेंडा मशीनरी का हिस्सा बन गए हैं !

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कुछ दिन पहले की बात है. सब्जी लेने गया था.

कोरोना पर बात छिड़ी तो फटी कमीज पहने सब्जी बेच रहे बीस-बाइस साल के युवक ने कहा- ‘सब्जी बेच रहा हूं, अगर खाली होता तो मुल्लों को गोली मार रहा होता. गंद मचा दी है इन जमातियों ने.’

मैंने मुस्कुराते हुए कहा भैया दो किलो आलू तोलो.

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और वो बात वहीं ख़त्म हो गई. मुझे उस सब्ज़ी बेचने वाले पर ज़रा भी ग़ुस्सा नहीं आया.

बल्कि तरस आया. अच्छा खासा खाते-कमाते आदमी के मन में हिंसक विचार चल रहे हैं.

ख़ैर.. मन में प्रश्न भी उठा कि मेहनत करके किसी तरह परिवार का पेट पाल रहे व्यक्ति के मन में ये हिंसक विचार क्यों आ रहे हैं?

इसका जवाब स्पष्ट है. भारतीय मीडिया ने मुसलमानों के ख़िलाफ़ एक कैंपने सा चलाया हुआ है.

कोई गली छाप पत्रकार हो तो बात अलग है. लेकिन यहां तो शीर्ष पर बैठे संपादक खुले आम पत्रकारिता के मूल सिद्धांतों का मखौल उड़ा रहे हैं.

उन्हें कोई डर नहीं है. कोई परवाह नहीं है. कोई फ़िक्र नहीं है.

अब रजत शर्मा को ही ले लीजिए, ये भारत के शीर्ष संपादकों में शामिल हैं. देश का बड़ा मीडिया समूह चलाते हैं. और इनके पास तमाम रिसोर्सेज़ हैं, ये तथ्यों की जांच कर सकते हैं.

लेकिन कल किए उनके इस ट्वीट से लगता है कि वो प्रोपागेंडा मशीनरी का हिस्सा बन गए हैं.

बीबीसी हिंदी पत्रकार दिलनवाज़ पाशा की फेसबुक वाल से लिया गया लेख.

आपको बता दे कि, रजत शर्मा के विवादित ट्वीट के बाद सोशल मीडिया में उनकी जमकर आलोचना हो रही है. कई सोशल एक्टिविस्ट और बॉलीवुड हस्तियाँ भी रजत शर्मा के इस ट्वीट की आलोचना कर रहे हैं.

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