गौरक्षा के नाम पर ह!त्या करने वालों को इन संगठनों से मिलता है पैसा, स्टिंग ऑपरेशन में खुलासा

गो!रक्षा के नाम पर मॉ!ब लिंचिं!ग देश की कड़वी हकीकत है, धर्म के नाम पर भीड़ पा!गल से हैवा!न बन जाती है। इस सब के बीच बड़ा सवाल है कि आखिर ये हिं!सा करवाता कौन है? एबीपी न्यूज़ ने इसी सवाल का जवाब जानने की कोशिश की तो बेहत हैरान करने वाली हकीक़त सामने आई। अगस्त महीने के पहले सात दिनों हुई इस पड़ताल में खुलासा हुआ कि कोई है जो मॉ!ब लिं!चिंग करने वालों के अकाउंट में पैसा डाल रहा है। उनकी मदद कर रहा है।

एबीपी न्यूज़ के कैमरे पर मॉ!ब लिं!चिग के तीन दो!षियों ने ये कुबूल किया कि उन्हें इसके लिए अज्ञात स्रोत से पैसे मिले। इनमें से एक ने बताया, ”25-25 हजार रुपया सभी लोगों को किसी संगठन के माध्यम से मिला है। क्या संगठन है ? हमको भी जानकारी नहीं है। पत्नी के नाम पर अकाउंट में 25 हजार रुपया मिल जाता है। क्योंकि हम लोग तो जे!ल में थे। लेकिन बाद में चेक क्लीयरेंस हुआ तो आया हुआ है अकाउंट में।”

मॉब लिंचिंग के जिन तीन दो!षियों पर एबीपी न्यूज़ ने पड़ताल की उनके नाम नित्यानंद महतो, विक्की साव और कपिल ठाकुर हैं। ये तीनों 29 जून 2017 को झारखंड के रामगढ़ में गोमां!स के शक में अलीमुद्दीन अंसारी की पी!ट-पी!ट कर ह!त्या करने के दोषी हैं। इस मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने 11 आरोपियों को दोषी मानते हुए उम्रकै!द की सजा सुनाई। जिसके बाद झारखंड हाईकोर्ट से 8 सजायफ्ता दो!षियों को जमानत दे दी। जिनमें से इन दोषियों को जयंत सिन्हा ने घर बुलाकर फूल माला से स्वागत किया, जिसके लिए उन्हें माफी भी मांगनी पड़ी।

नित्यानंद महतों ने क्या बताया?

खुद को भारतीय जनता पार्टी के रामगढ़ जिला ईकाई का मीडिया प्रभारी बताने वाले नित्यानंद महतो ने खुफिया कैमरे पर बताया कि अलीमुद्दीन ह(त्याकां)ड में फंसने के बाद जब वो जेल की सलाखों के पीछे था। उन्हीं दिनों किसी ने उसकी पत्नी के बैंक अकाउंट में 25 हजार रूपये जमा करवाए। नित्यानंद ने बताया कि इसी तरह अलीमुद्दीन ह(त्याकां)ड में फंसे बाकी लोगों के परिवारवालों को भी पैसे दिए गए। नित्यानंद ने अलीमुद्दीन ह(त्याकां)ड में बेहद सफाई से खुद को क्लीन चिट दे दी।

जयंत सिन्हा के साथ तस्वीर पर क्या बोला नित्यानंद?

जयंत सिन्हा के साथ फोटो के सवाल पर नित्यानंद ने बताया, ”जयंत सिन्हा जो हैं, उन्होंने जेल गेट पर अपना आदमी भेज दिया। उन लोगों को वहां से उठा कर के सीधे हाइजैक करके सीधे अपने वाले ऑफिस में ले आया और वहां बढ़िया फूल माला मिठाई खिलाया।

उस पूरे कार्यक्रम का संज्ञान हाइकोर्ट ने लिया। आठ के बाद जब दो अन्य लोगों की जमानत याचिका लगाई गई तब कोर्ट ने इस पर सवाल खड़ा किया। कोर्ट ने कहा कि मैं यहां आपको राहत दे रहा हूं और वहां आप लोग वहां नेतागीरी करने के लिए गए हैं आप लोग। मैं बेल नहीं दूंगा इनको।”

दूसरे दो!षी विक्की साव और कपिल ठाकुर ने क्या बताया?

नित्यानंद महतो के अलावा बाकी दो अन्य दो!षियों ने भी पैसा मिलने की बात कुबूल की। लेकिन ये पैसा कहां से आया ये उन्हें भी नहीं पता। विक्की ने बताया कि वो पैसे की तंगी से जूझ रहा है। लेकिन जिस संगठन ने उसको 25 हजार रुपये दिए थे वो संगठन मदद लिए दोबारा आगे नहीं आया।

कपिल ठाकुर पहले तो पैसा मिलने की बात से इनकार कर दिया लेकिन बाद में उसने ये बात कबूल कर ली। कपिल ने भी बताया कि एक बार घरवालों के खाते में 25 हजार रुपया आया था। इस पूरे ऑपरेशन के बाद एक बड़ा सवाल खड़ा हुआ कि आखिर वो कौन सी अदृश्य शक्ति है जो इन गुनहगारों की मदद कर रही है?

मॉ!ब लिं!चिग को लेकर सबसे बड़ी अदालत सख्त

17 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने भीड़ की हिंसा रोकने के लिए केंद्र और राज्यों को 10 सूत्रीय निर्देश दिए। 4 सितंबर तक 29 में से सिर्फ 9 राज्यों ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश लागू किए थे। सुप्रीम कोर्ट को इस मामले में 4 बार फटका!र लगानी पड़ी। इसके बाद 24 सितंबर तक देश के 8 राज्य भीड़ की हिं!सा रोकने वाले निर्देश लागू करने में फेल रहे।

घंटी बजाओ: ऑपरेशन अदृश्यम- देखिए गौरक्षा क नाम पर मॉब लिंचिंग की कड़वी हकीकत

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Posted by ABP News on Wednesday, October 3, 2018