तीन तलाक के बाद अब मोदी 2.0 मुस्लिम महिलाओ के लिए लाएगी ये कानू!न

ट्रिपल तलाक़ बिल के बाद मुंबई स्थित मुस्लिम महिलाओं के एक ग्रुप ने हि!न्दू और ईसाई कानू!नों की तरह मुस्लिम महिलाओं के लिए बरा!बरी सुनिश्चित करने की मांग की है। ग्रुप ने सरकार से संसद में ‘मुस्लिम फैमिली लॉ’ लाने की मांग की है।

भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन (BMMA) ने केंद्रीय क़ानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद को इस संबंध में चिट्ठी लिखी है। ग्रुप का कहना है कि लैंगिक न्याय (Gender justice)  और लैंगिक समानता (Gender equality) के लिए मुस्लिम फैमिली लॉ होना ज़रूरी है।

मुस्लिम महिला ग्रुप ने बीते हफ्ते केंद्रीय कानून और न्याय मंत्री रविशंकर प्रसाद को चिट्ठी भेजी। ग्रुप की इसी मुद्दे पर केंद्रीय अल्पसंख्यक मा!मलों के मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी से भी मुलाकात हो चुकी है।

चिट्ठी में कहा गया है कि ट्रिपल तलाक को ख!त्म करने की मुहिम ‘मुस्लिम महिला (शादी के अधिकार का संरक्षण) बिल’ के पास होने से कामयाब हुई। लेकिन बहुविवाह, हलाला, शादी की उम्र जैसे मुद्दे अब भी अनसुलझे हैं। सोमन ने कहा कि मौजूदा सरकार मुस्लिम महिलाओं से जुड़े मु!द्दों को सुलझाने के लिए गं!भीर है।

सोमन ने कहा, “हम इन अधिकारों के लिए वर्षों से मांग कर रहे हैं  लेकिन इस सरकार ने ही इन  मु!द्दों में दिलचस्पी दिखाई। हम ये भी मांग कर रहे हैं कि ‘स्किल इंडिया’ और ‘स्टैंडअप इंडिया’ जैसी योजनाओं से मुस्लिम महिलाओं को जो!ड़ने के लिए सरकार पहल करे। मुस्लिम महिलाओं की शिक्षा का स्तर सबसे पि!छड़ा है। वो पढ़ना चाहती हैं और सरकार की सुविधाएं इस काम में उनकी मदद करेंगी।”

चिट्ठी 10 राज्यों में किए गए सर्वेक्षण पर आधारित हैं जिसमें 5,000 मुस्लिम महिलाओं ने हिस्सा लिया। ये डेटा 2015 में  जारी किया गया था। सर्वेक्षण के अनुसार 91।7 प्रतिशत महिलाओं ने बहुविवाह के खि!लाफ प्रतिक्रिया दी थी। उनका कहना था कि पहली पत्नी की रज़ामंदी हो या नहीं, बहुविवाह की अनुमति नहीं होनी चाहिए। सर्वेक्षण में महाराष्ट्र, गुजरात, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, बिहार, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश, राजस्थान, झारखंड और ओडिशा जैसे राज्य कवर किए गए।