राफेल केस में मोदी सरकार ने की एक और गलती, SC ने किया बड़ा खुलासा, फिर अटॉर्नी जनरल ने दिया ये बयान

राफेल के!स में मोदी सरकार की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में एक और गल!ती का खु!लासा हुआ है और इसे खुद अटॉर्नी जनरल ने कबूल किया है। गुरुवार (14 मार्च) को अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कोर्ट को बताया कि राफेल डील के!स में हमने सीएजी की रिपोर्ट सबमिट करने के दौरान एक ग!लती कर दी है।

सीएजी रिपोर्ट के शुरुआती तीन पन्ने कोर्ट को नहीं सौंपे गए हैं। वेणुगोपाल ने कहा कि सरकार भी चाहती है कि सीएजी रिपोर्ट के पहले तीन पन्ने भी कोर्ट में ऑन रिकॉर्ड दस्तावेज के तौर पर शामिल किए जाएं। बता दें कि एक दिन पहले ही केंद्र सरकार ने इस मामले में एक हलफनामा ज!मा कर कोर्ट से कागजात लीक करनेवालों को दं!ड देने की गुजारिश की थी। फिलहाल कोर्ट ने उस पर फैसला नहीं सुनाया है।

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (14 मार्च) को स्पष्ट किया कि राफेल ल!ड़ा!कू विमान सौदे के तथ्यों पर गौर करने से पहले वह केन्द्र सरकार द्वारा उ!ठाई गयी प्रारंभिक आ!पत्ति!यों पर फै!सला करेगा।

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस केएम जोसेफ की पीठ ने शीर्ष अदालत के आदेश पर पुर्निवचार का अ!नुरो!ध करने वाले याचिकाकर्ताओं से कहा कि पहले वह लीक हुए दस्तावेजों की स्वीकार्यता के बारे में प्रारंभिक आ!पत्ति!यों पर ध्यान दें। पीठ ने कहा, ‘‘केन्द्र द्वारा उठाई गयी प्रारंभिक आ!पत्ति!यों पर फैसला करने के बाद ही हम मा!मले के त!थ्यों पर गौर करेंगे। ’’

इससे पहले, मा!मले की सुनवाई शुरू होते ही केन्द्र की ओर से अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने फ्रांस के साथ हुये राफेल ल!ड़ा!कू विमानों के सौदे से संबंधित दस्तावेजों पर विशेषाधिकार का दावा किया और न्यायालय से कहा कि संबंधित विभाग की अनुमति के ब!गैर कोई भी इन्हें अदालत में पेश नहीं कर सकता।

वेणुगोपाल ने अपने दावे के समर्थन में साक्ष्य कानून की धारा 123 और सूचना के अधिकार कानून के प्रावधानों का ह!वा!ला दिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित कोई भी दस्तावेज कोई प्रकाशित नहीं कर सकता क्योंकि राष्ट्र की सुरक्षा सर्वोपरि है।

शीर्ष अदालत के फैसले पर पुनर्विचार का अ!नु!रोध करने वाले याचिकाकर्ताओं में से एक अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि राफेल सौदे के दस्तावेज, जिन पर अटार्नी जनरल विशेषाधिकार का दावा कर रहे हैं, प्रकाशित हो चुके हैं और यह पहले से सार्वजनिक दायरे में हैं।

भूषण ने किहा कि सूचना के अधिकार कानून के प्रावधान कहते हैं कि जनहित अन्य बातों से सर्वोपरि है और गुप्तचर एजेन्सियों से संबंधित दस्तावेजों के अलावा किसी भी अन्य दस्तावेज पर विशेषाधिकार का दावा नहीं किया जा सकता। भूषण ने कहा कि राफेल विमानों की खरीद के लिये दो सरकारों के बीच कोई करार नहीं है क्योंकि फ्रांस सरकार ने भारत को कोई संप्रभु गारंटी नहीं दी है। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय प्रेस परिषद कानून में पत्रकारों के स्रोत को संरक्षण प्रदान करने का प्रावधान है।