भागवताचार्य देवकीनंदन ठाकुर ने एससी-एसटी एक्ट संशोधन के खिलाफ सरकार को दी ये चेतावनी

एससी-एसटी एक्ट में किए बदलाव को समाज बांटने वाला बताते हुए भागवताचार्य देवकीनंदन ठाकुर ने कहा है कि केंद्र सरकार अगले दो महीने में इस एक्ट को सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार रूप में बदल दे। यदि ऐसा नहीं हुआ तो हम सब मिलकर देश को जातिगत राजनीति वाले दलों से स्थाई समाधान देंगे।

वे मंगलवार को एससी-एसटी एक्ट के विरोध में सवर्ण-पिछड़ा वर्ग द्वारा लक्ष्मीबाई समाधि स्थल के सामने आयोजित स्वाभिमान सम्मेलन में जनसमूह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सभी लोग साथ रहें, दो महीने बाद राजनीतिक दलों को अप्रत्याशित परिणाम देंगे।

सम्मेलन में श्री राजपूत करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना ने कहा- इस एक्ट में संशोधन कराने तक आंदोलन को शांत नहीं होने दिया जाएगा। 16 सितंबर को भिंड व मुरैना और 23 को चित्तौड़ में यही आंदोलन होगा। कार्यक्रम के अंत में मनमोहन शर्मा माइक पर यह कहते हुए नीचे उतरे कि अब यह मेरा कार्यक्रम नहीं रहा। मैं जा रहा हूं, इसके पीछे श्री मकराना के उस बयान काे कारण माना जा रहा है,

जिसमें उन्होंने कहा कि प्रशासन से किसी ब्राह्मण के नाम परमिशन लेकर ऐसे आयोजन करो। सम्मेलन में सरकारी अधिकारी-कर्मचारी बड़ी संख्या में शामिल हुए। भाजपा, कांग्रेस व आरएसएस से जुड़े लोग भी पहुंचे। इससे पहले सर्व समाज ने रैली निकालकर संभाग आयुक्त को ज्ञापन सौंपा। सभा के फेर में पड़ाव से फूलबाग तक ट्रैफिक जाम के हालात बने रहे।

23 मिनट के भाषण में सरकार और नेताओं को कोसा, हाथ उठवाकर मांगा साथ

जानिए…किस मुद्दे पर क्या बोले देवकीनंदन ठाकुर

राजनीति: भारत में लोगों को इतना तो अंग्रेज भी नहीं बांट पाए थे, जितना कि जातियों की राजनीति करते हुए चंद लोगों ने बांट दिया। जाति के नाम पर लोगों को बांटने वाले गद्दारों को उनकी औकात दिखाना जरूरी है। इन लोगों को घर, समाज, देश से बाहर का रास्ता दिखाइए। ये समाज में जाति का जहर घोल रहे हैं।

नोटा: किसी राजनीतिक दल ने संसद में इस एक्ट को लेकर कुछ नहीं कहा। ऐसे में लोग नोटा को ऑप्शन बता रहे हैं। लेकिन मैं इसके पक्ष में बिल्कुल नहीं हूं, क्योंकि जिसको ज्यादा वोट मिलेंगे। वो पार्टी प्रत्याशी जीत जाएगा। इसलिए नोटा नहीं, इसके परमानेंट सॉल्यूशन पर जाना है, जो हम देंगे। 2 माह का वक्त है सरकार के पास, या तो एक्ट को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक करे या फिर हम वो करेंगे जो देश में कभी नहीं हुआ।

एससी-एसटी वर्ग: इस वर्ग के लोग हमारे दुश्मन नहीं हैं। हमारे दुश्मन वो नेता हैं, जिन्होंने हम लोगों को बांटने का काम किया है। बल्कि मैं तो इस वर्ग के लोगों को ऐसे नेताओं से सावधान कर रहा हूं कि वो इनका सिर्फ उपयोग करेंगे। हर एससी-एसटी व्यक्ति को खुद उक्त एक्ट का विरोध करना चाहिए।

एससी-एसटी एक्ट: भारत में हत्या, घोटाले के अपराध में जमानत का प्रावधान है लेकिन इस एक्ट में सरकार ने ऐसा इंतजाम कर दिया है कि जिस पर ये केस लगेगा, उसे पहले 6 महीने के लिए ससुराल (जेल) जाना पड़ेगा। पाकिस्तान तक में ऐसा कोई कानून नहीं है।

देश: यहां कोई करणी सेना की जय बोल रहा, कोई परशुराम सेना की। एक बात समझ लो, हम सबको सिर्फ एक ही नारा देना है-भारत माता की जय। सिर्फ देश के तिरंगे झंडे के नीचे इकट्ठे रहना है तभी हम आगे बढ़ सकते हैं।

अहिंसा: लोगों को शपथ दिलाई कि एससी-एसटी एक्ट के विरोध में आंदोलन करेंगे, लेकिन कहीं भी एक चवन्नी का भी नुकसान नहीं करेंगे। क्योंकि ये देश और इस देश की संपत्ति व लोग हमारे हैं।

सरकार: सरकार में बैठे लोग बेशक कानून बनाते हों, लेकिन ये जान लो कि इन कानून बनाने वालों को सरकार हम बनाते हैं। इन चौकीदारों को तो हमने देश की सत्ता चलाने के लिए भेजा है। सरकार हमारी है और बाकी 2019 में पता चल जाएगा कि सरकार किसकी होती है।

भविष्य की चिंता: सभा में खड़े लोगों को बैठने के लिए कहते हुए बोले कि अभी इस कीचड़ में आप नहीं बैठ रहे हो। लेकिन इस एक्ट से बच्चों के भविष्य पर जिस कीचड़ का संकट खड़ा हो रहा है। उसके बारे में सोचो और बैठ जाओ।

खुद के बारे में: मैं नेता नहीं हूं, मुझे आग लगाना नहीं आता और न बंद कराना आता है। मुझे सिर्फ एक बात आती है कि हमें मिलकर देश को सुरक्षित रखना है।

अगली रणनीति: बुधवार को वृंदावन में विप्र सम्मेलन होगा। इसमें करीब 1 लाख लोग जुटेंगे और इस एक्ट के विरोध में चर्चा होगी। उन्होंने संकेत दिए कि एक्ट में बदलाव न करने पर राजनीतिक पार्टी बनाने की दिशा में कदम बढ़ सकता है।

भारत बंद: सवर्ण आंदोलन के सूत्रधार देवकी नंदन ठाकुर बोले- ये कानून समाज को बांटने वाला है

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Posted by ABP News on Thursday, September 6, 2018