सीबीआई चीफ ने खोली मोदी सरकार की पोल, कहा: ‘जांच सरकार के मुताबिक नहीं चली तो…’

सीबीआई के दो शीर्ष अफसरों के रिश्वतखो!री विवा!द में फंस!ने के बा!द केंद्र सरकार ने ज्वाइंट डायरेक्टर ना!गेश्वर राव को जांच एजेंसी का अंतरिम प्रमुख नियुक्त कर दिया। जां!च जारी रहने तक सीबीआई चीफ आलो!क वर्मा और नंबर दो अफसर स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना को छुट्टी पर भेज दिया गया।

वर्मा ने सरकार के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। उन्होंने अदा!लत से कहा कि केंद्र सरकार ने रातोंरात उनके अधिका!र छीन लिए। यह कदम सीबीआ!ई की स्वतंत्रता में हस्तक्षेप है। वर्मा ने कहा कि शायद उच्च पदों पर बैठे लोगों के खिला!फ एजेंसी की जांच सरका!र के मुताबिक नहीं चली।

सुप्रीम कोर्ट सरकार के फैसले पर रोक लगा!ए ताकि इस तरह का बा!हरी हस्तक्षेप दोबारा ना हो। मौजूदा हालात के लिए जिम्मेदा!र कई केसों की जानकारी बेहद संवेदनशील है और मौजूदा याचि!का में उनका पूरी तरह से खुला!सा नहीं किया जा सकता।

हालांकि, याचिकाकर्ता आगे इस अदालत को ये चीजें सौंप सकता है। अलग-अलग मामलों पर सरकार की तरफ से जो भी प्रभा!व रहा, वह सभी मौकों पर स्पष्ट या लिखित में नहीं था। (आलोक वर्मा, सीबीआई डायरेक्टर)

वर्मा ने 1986 बैच के ओडिशा कैडर के आईपीएस ज्वाइंट डायरेक्टर एम नागेश्वर राव को सीबीआई का प्रभार दिए जाने के फैसले को भी चुनौ!ती दी। वर्मा के वकील गोपाल शंकरनारायणन ने चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस एसके कौल और जस्टिस केएम जोसेफ की बेंच से तत्काल इस मामले में सुनवाई की अपील की थी। अदालत ने सुनवाई के लिए 26 अक्टूबर की तारीख तय की।

वर्मा ने कहा- यह कदम सीबीआई की स्वतंत्रता में दखल

वर्मा ने कहा- केंद्र और केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) का कदम अ~वैध है और ये पूरी तरह अ~वैध और प्रमुख जांच एजेंसी की स्वा!यत्तता में हस्तक्षेप है। सीबीआई डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग के अधिकार क्षेत्र में है। इसे स्वतंत्र होना चाहिए, नहीं तो जांच एजेंसी का स्वतंत्र संचा!लन प्रभा!वित होता है।

वर्मा ने कहा- कुछ समय पहले तक सीबीआई के भीतर ज्वाइंट डायरेक्टर और डायरेक्टर स्तर तक के निगरा!नी और जांच अधिकारी किसी निश्चित कार्ययोजना को लेकर एक ही नजरिया रखते थे, लेकिन स्पेशल डायरेक्टर का अलग मत रहता था।

सरकार ने कहा- निष्पक्ष जांच के लिए अफसरों को छुट्टी पर भेजा

जेटली ने कहा, ‘सरकार ने सिर्फ केंद्रीय सतर्कता आ!योग की सिफारिशों को माना है और निष्पक्ष जांच के लिए दोनों अफसरों को छुट्टी पर भेजा गया है। किसी एक अफसर को बचाने! के विपक्ष के आ!रोप बेतुके हैं। एक विचित्र और दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति पैदा हुई जब सीबीआई के दो बड़े अधिकारियों ने एक-दूसरे के खिला!फ आ!रोप लगाए हैं। इस मामले की जांच सरकार नहीं कर सकती। जांच सीबीआई ही करेगी और वह जांच निष्पक्ष तरीके से हो रही है या नहीं, इसकी निगरानी केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) करेगा।”

सीबीआई का अपने ही दफ्तर में दूसरी बार छा!पा

सीबीआई ने बुधवार को तीन दिन में दूसरी बार अपने ही मुख्यालय पर छापा मारा। अफसरों ने वर्मा और अस्थाना के दफ्तरों की फा!इलें खंगालीं। मंगलवार रात भी 15 अफसरों की टीम सीबीआई दफ्तर पहुंची थी। सू्त्रों का कहना है कि सीबीआई चीफ का प्रभार संभा!लने वाले एम नागेश्वर राव भी सीबीआई मुख्यालय पहुंचे थे।

प्रशांत भूषण ने भी लगाई याचिका

वकील प्रशांत भूषण ने भी सुप्रीम कोर्ट में याचिका दा!यर की है। उनका आ!रोप है कि केंद्र सरकार गुजरात कैडर के अफसर अस्था!ना को बचा रही है। दो साल की अवधि से पहले किसी भी सीबीआई चीफ को नहीं हटाया जा सकता। इसके बावजूद आलोक वर्मा को छुट्टी पर भेजा गया।

अस्थाना ने एफआईआर को हाईकोर्ट में दी चुनौती

सीबीआई ने राकेश अस्थाना के खिला!फ एफआ!ईआर दर्ज की है। अस्थाना की एसआईटी में शामिल रहे एक डीएसपी देवेंद्र कुमार को गिरफ्तार किया है। अस्थाना ने मंगलवार को दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर अपने खिलाफ एफआईआर रद्द करने की मांग की थी। इस मामले में अदालत 29 अक्टूबर को सुनवाई करेगी। तब तक अस्थाना के खिला!फ कार्रवाई करने पर रोक लगाई गई है।

सीबीआई में पहली बार दो बड़े अफसरों के बीच लड़ा!ई

2016 में सीबीआई में नंबर दो अफसर रहे आरके दत्ता का तबा!दला गृह मंत्रालय में कर अस्थाना को लाया गया था।

दत्ता भावी निदेशक माने जा रहे थे, लेकिन गुजरात कैडर के आईपीएस अफसर राकेश अस्था!ना सीबीआई के अंतरिम चीफ बना दिए गए। अस्थाना 1979 की बैच के आईपीएस अफसर हैं।

अस्थाना की नियुक्ति को वकील प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौ!ती दे दी थी।

इसके बाद फरवरी 2017 में आलोक वर्मा को सीबीआई चीफ बनाया गया। वर्मा 1984 की आईपीएस बैच के अफसर हैं।

सीबीआई चीफ बनने के बाद आलोक वर्मा ने अस्था!ना को स्पेशल डायरेक्टर बनाने का विरो!ध कर दिया। उन्होंने कहा था कि अस्थाना पर कई आ!रोप हैं, वे सीबीआई में रहने ला!यक नहीं हैं।

माेइन कुरैशी के मामले की जांच से शुरू हुआ रिश्वतखो!री विवा!द

1984 आईपीएस बैच के गुजरात कैडर के अफसर अस्थाना मी~ट कारोबारी मोइन कुरैशी से जुड़े मामले की जांच कर रहे थे। इस जांच के दौरान हैदरा!बाद का सतीश बाबू सना भी घेरे में आया। एजेंसी 50 लाख रुपए के ट्रांजैक्शन के मा!मले में उसके खिला!फ जांच कर रही थी।

सना ने सीबीआई चीफ को भेजी शिकायत में कहा कि अस्थाना ने इस मा!मले में उसे क्लीन चिट देने के लिए 5 करोड़ रुपए मांगे थे। हालांकि, 24 अगस्त को अस्थाना ने सीवीसी को पत्र लिखकर डायरेक्टर आलोक वर्मा पर सना से दो करोड़ रुपए लेने का आ!रोप लगाया था।