राजस्थान में बीजेपी को फिर से जबरदस्त नुकसान, वसुंधरा के ख़ास मंत्री ने छोड़ी पार्टी

राजस्थान विधानसभा चुनाव में प्रदेश की दोनों बड़ी पार्टियों के उम्मीदवारों की घोषणा हो चुकी है। यहां तक की सभी उम्मीदवारों ने अपना नामांकन भी भर दिया है। लेकिन उम्मीदवारों की घोषणा होते ही दोनों पार्टियों में विरो!धी स्वर उठने लगे थे। वहीं टिकट न मिलने को लेकर कई नेताओं के विरो!ध तो बगा!वत तक जा पहुंचा।

इसी क्रम में भारतीय जनता पार्टी द्धारा बांसवाडा विधानसभा से वसुंधरा राजे के खास मंत्री धनसिंह रावत का टिकट का!टना बीजेपी को का!फी भारी पड़ गया। एक ओर जहां पार्टी लगातार नामांकन समाप्त होने से पहले बागी नेताओं को मनाने और नामांकन वापस लेने के लिए बात करती रही।

तो वहीं दूसरी ओर धनसिंह रावत ने बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष को अपना त्याग पत्र सौंपते हुए कहा कि वह बांसवाड़ा से निर्दली!य चुनाव लड़ रहे हैं और इस कारण वह बीजेपी को छोड़ रहे हैं। उन्होंने कहा मेरा त्याग पत्र स्वीका!र करें। आपको बता दें, रा!वत को बीजेपी द्वारा टिकट न दिए जाने के कारण उनके समर्थकों में भी विरो!ध देखा गया और उनसे पहले उनके 300 समर्थक भी बीजेपी को त्यागपत्र सौंप चुके हैं।

यह भी माना जा रहा है कि समर्थकों के कारण ही रावत ने नामांकन भरा। वहीं हजारों की भीड़ देख बीजेपी और पार्टी के उम्मीदवार को सोचने पर मजबूर कर दिया है।  जिसके बाद बीजेपी से बांसवांड़ा के उम्मीदवार को यह कहना पड़ा कि वो मेरे बड़े भाई हैं। मैने उनका आर्शीवाद लिया है और उन्होंने मुझे आर्शीवाद भी दिया है।

हालांकि, लाडपुरा से बगावत के बाद निर्दलीय चुनाव ल;ड़ने का फैसला करने वाले भवानी सिंह और सांगानेर से ज्ञानदेव आहूजा ने बीजेपी द्वारा मनाए जाने और बातचीत के बाद अपने अपने नामांकन वापस ले लिए हैं और इन दोनों सीटों पर बीजेपी की राह को आसा!न किया है लेकिन बांसवाड़ा से धन सिंह रावत का नामांकन वापस न लिया जाना 7 दिसंबर को होने वाले चुनाव में कहीं न कहीं बीजेपी के लिए चुनौती साबित हो सकता है।

धन सिंह रावत को बीजेपी द्वारा टिकट न दिए जाने के कारण उनके समर्थकों ने काफी विरोध जताया था। उनके 300 से ज्यादा समर्थक भी बीजेपी छोड़ चुके हैं। धन सिंह के साथ हजारों की भीड़ देख बांसवांड़ा से भाजपा उम्मीदवार हकरू मईड़ा को कहना पड़ा कि वह मेरे बड़े भाई जैसे हैं।