छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल चुने गए मुख्यमंत्री, इस तरह लिया गया ये कठिन फैसला

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छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के विधायक दल की बैठक में मशविरे के बाद आखिरकार मुख्यमंत्री के नाम का ऐलान हो गया है। प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष भूपेश बघेल राज्य के नए मुख्यमंत्री होंगे। बैठक में पिछली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे अंबिकापुर से विधायक टीएस सिंहदेव ने उनके नाम का प्रस्ताव रखा। वहीं सांसद ताम्रध्वज साहू और चरणदास महंत ने सिंहदेव के प्रस्ताव का समर्थन किया।

15 साल से चल रहे सत्ता के सूखे को खत्म करते हुए कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ में एकतरफा जीत हासिल की। लेकिन मुख्यमंत्री के नाम के लिए पांच दिन तक जद्दोजहद चलती रही। मुख्यमंत्री चयन की प्रक्रिया में प्रस्तावकों और समर्थकों के नाम से साफ है कि कांग्रेस ने डैमेज कंट्रोल के लिए एकजुटता दिखाने की कोशिश की है।

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…ऐसे चली मुख्यमंत्री चयन की जद्दोजहद

मध्य प्रदेश और राजस्थान में दो-दो चेहरों के बीच चयन करने में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी थी। इसी तरह छत्तीसगढ़ में भी इस रेस में कई नाम शामिल थे। भूपेश बघेल के अलावा यहां टीएस सिंहदेव, ताम्रध्वज साहू और चरणदास महंत जैसे नाम भी फेहरिस्त में थे।

हालांकि शुरुआत में भूपेश बघेल को ही सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा था लेकिन बाद में टीएस सिंहदेव का नाम जोर पकड़ने लगा। उधर खुद राहुल गांधी की तरफ से विधानसभा चुनाव लड़ने भेजे गए छत्तीसगढ़ के एकमात्र कांग्रेसी लोकसभा सांसद ताम्रध्वज साहू को लेकर भी अटकलें लगाई जा रही थीं।

ऐसा रहा है सियासी करियर

23 अगस्त 1961को एक किसान परिवार में जन्मे भूपेश बघेल ने 1980 के दशक की शुरुआत में अपने सियासी करियर की शुरुआत की थी। दिवंगत चंदूलाल चंद्राकर को वे अपना राजनीतिक गुरु मानते हैं। पिछले डेढ़ साल से वे एक सी!डी कां!ड को लेकर भी खासे चर्चा में हैं। सुकमा नक्स!ली हमले में प्रदेश कांग्रेस के दिग्गज नेतृत्व के सफाए के बाद पांच साल में बघेल ने का!फी मेहनत की है।

– 1985 में वे युवा कांग्रेस से जुड़े और दुर्ग जिले के अध्यक्ष बने।

– 1994 में वे मध्य प्रदेश कांग्रेस के उपाध्यक्ष भी बने।

– 1993 में पहली बार पाटन सीट से विधायक बने।

– 1998 में दूसरी बार पाटन से विधायक बने।

– 1998 में दिग्विजय सरकार में राज्य मंत्री बने।

– 1999 में दिग्विजय सरकार में परिवहन मंत्री भी बने।

– 2000 में मध्य प्रदेश राज्य परिवहन निगम के अध्यक्ष बने।

– नवंबर 2000 में वे छत्तीसगढ़ के पहले राजस्व, जन स्वास्थ्य और राहत कार्य के मंत्री बने।

– 2003 और 2013 में फिर पाटन से ही विधायक बने।

– 2004 में दुर्ग सीट से लोकसभा चुनाव लड़े लेकिन हार का सामना करना पड़ा।

– 2009 में रायपुर सीट से लोकसभा लड़े लेकिन हार का सामना करना पड़ा।

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