अयोध्या केस: वि!वादित जमीन पर ब!हस जारी, रामलला के वकील ने कहा- मस्जिद बनाने के लिए तो!ड़ा…

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सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court of India) में अयोध्या वि!वाद (Ayodhya Dispute) को लेकर सुनवाई लगातार जारी है। फिलहा!ल रामलला विराजमान के वकील अपना पक्ष रख रहे हैं। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अगुवाई में सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ के समक्ष रामलला विराजमान के वकील ने एएसआई की रिपोर्ट का ह!वाला देते हुए कहा कि अयोध्या में वि!वादित स्थल पर मस्जिद बनाने के लिए हिं!दुओं का मंदिर तो!ड़ा गया।

रामलला विराजमान की तरफ से वरिष्ठ वकील सीएस वैद्यनाथन ने कहा कि एएसआई की रिपोर्ट में मगरमच्छ और कछुए का जिक्र किया है, जो मुस्लिम संस्कृति का हिस्सा नहीं हैं।

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इस दौरान वरिष्ठ वकील ने एएसआई (ASI) रिपोर्ट के आधार पर कई अन्य पुरातात्विक सबूतों को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष पेश करते हुए कहा कि विवा!दित स्थल एक हिं!दू मंदिर था।

12वीं सदी के शिलालेख का ह!वाला

इस दौरान रामलला के वकील ने 12वीं सदी के शिलालेख का ह!वाला दिया। उन्होंने कहा कि पत्थर की जिस पट्टी पर संस्कृत का ये लेख लिखा है, उसे वि!वादित ढांचा विध्वंस के समय एक पत्रकार ने गि!रते हुए देखा था। इसमें साकेत के राजा गोविंद चंद्र का नाम है। साथ ही लिखा है कि ये विष्णु मंदिर में ल!गी थी।

उन्होंने कहा कि 115 सेमी लंबाई और 55 सेमी चौड़ा शिलालेख तीन चार सप्ताह तक राम कथा कुंज में रखा रहा। यह मस्जिद ढ!हने को बाद मिला, इस पर किसी पक्षकार कि ओर से आ!पत्ति नहीं ज!ताई गई है।

जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि क्या ये सब ASI द्वारा इकट्ठा किया गया था? रामलला के वकील वैद्यनाथन ने कहा कि ये ASI रिपोर्ट में नहीं था, ASI काफी बाद में आई थी। सीएस वैद्यनाथन ने ASI रिपोर्ट का ह!वाला देते हुए मगरमच्छ, कछुओं का भी जिक्र किया और कहा कि इनका मुस्लिम कल्चर से मतलब नहीं था।

‘जन्मस्थान पर था एक बड़ा मंदिर’

विराजमान ने कहा कि ASI कि रिपोर्ट में जो तथ्य दिए गए हैं कि मस्जिद के स्थान पर मंदिर था और मंदिर पर मस्जिद बना दी गई। यह शिलालेख इस नि!ष्कर्ष पर पहुंचाता है कि जन्मस्थान पर एक बड़ा मंदिर था। इस दौरान वैद्यनाथन ने वि!वादित ढांचा ढ!हाने के समय की पांचजन्य के रिपोर्टर का रिपोर्ताज कोर्ट के सा!मने बयान किया।

– ढहाने के दौरान मैंने शिलाएं गि!रती हुई देखीं थीं तब कुछ पुलिस वाले उन पत्थरों को उ!ठाकर रामकथा कुंज ले गए।

– ये शिलाएं 4 फुट x 2 फुट आकार वाली थीं।

– वो शिलालेख राज्य पुरातत्व विभाग के अभिरक्षा (कस्टडी) में हैं।

वैद्यनाथन ने कहा कि खुदाई से मिले अवशेषों की वैज्ञानिक प!ड़ताल के बाद ASI की रिपोर्ट, मौके से मिले सबूत से कोई शंका या वि!वाद की गुंजाइश नहीं रह जाती। ये सब 11वीं सदी के दौरान निर्मित हैं।

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