अयोध्या के!स: सुप्रीम कोर्ट के सा!मने पेश किए गए ये सबूत, रामलला के वकील ने कहा- जमीन के नी!चे से…

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अयोध्या मा!मले में सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को भी सुनवाई हुई। अयोध्या श्री राम जन्मभूमि मा!मले में रामलला के वकील सी एस वैधनाथन ने ब!हस की शुरुआत की। पुरातत्व विभाग की खुदाई में मिले सबू!त को कोर्ट के समक्ष रखा गया।

रामलला विराजमान की तरफ से कोर्ट में सबूत पेश किए गए कि मस्जिद से पहले उस जगह पर मंदिर का अस्तित्व था। रामलला के वकील सी एस वैधनाथन कहा कि मुस्लिम पक्ष की तरफ से शुरुआत में कहा गया कि ज़मीन के नीचे कुछ नहीं है, लेकिन बाद में उन्होंने कहा कि जमीन के अंदर जो स्ट्रक्चर मिला है वो इस्लामिक स्ट्रक्चर है।

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वकील वैद्यनाथन ने कहा, पुरातत्व विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक जमीन के नीचे से मंदिर के स्ट्रक्चर मिले हैं। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने भी अपने फैसले में पुरातत्व विभाग की रिपोर्ट पर भरोसा किया है।

रामलला की तरफ से उदाहरण देते हुए कहा गया कि आज के दौर में लोग फ्लाइट लेकर सुबह सबरीमाला के दर्श!न के लिए जाते है और शाम को लौट आते है, लेकिन राम जन्मभूमि को लेकर श्रद्धालु कई सदियों से दर्शन के लिए जाते है, जबकि उस समय नदी के ऊपर कोई ब्रिज भी नहीं था।

उन्होंने आगे बताया कि 1114 ईसवी से 1155 ईसवी तक 12वीं शताब्दी में साकेत मंडला का राजा गोविंदा चंद्रा था। उस वक्त अयोध्या उसकी राजधानी थी। यहां विष्णु हरि का बहुत बड़ा मंदिर था।

पुरातत्ववि!द्दों ने इसकी पुष्टि की है। वैद्यानाथन ने कहा, भारत यात्रा पर आए कई यात्रियों ने अपनी किताब में उस जगह पर भव्य मंदिर की बात कही है। रामलला के वकील सी एस वैधनाथन ने कहा कि मुस्लिम पक्ष की तरफ से शुरुआत में कहा गया कि जमीन के नी!चे कुछ नहीं है, लेकिन बाद में उन्होंने कहा कि जमीन के अंदर जो स्ट्रक्चर मिला है वो इस्लामिक स्ट्रक्चर है।

रामलला के वकील सी एस वैधनाथन ने ASI की रिपोर्ट में मंदिर के अवशेष मिले है, इलाहाबाद HC ने भी ASI की रिपोर्ट को सही माना है। सी एस वैधनाथन ने कहा कि बाबरी मस्जिद के नीचे जो स्ट्रक्चर था उसकी ब!नावट उसमें मिली भगवान की तस्वीरें, मूर्तियां साबित होता है कि पहले से मंदिर था।

वैधनाथन ने कहा मस्जिद गि!रने के बाद एक पत्थर का स्लैब मिला, जिनमें 12 या 13वीं शताब्दी में लिखे एक शिलालेख शामिल हैं। शिलालेख थोड़ा क्षतिग्रस्त है और अं!तिम दो पंक्तियां भारी क्षतिग्रस्त हो गई हैं। शिलालेख का मूल पाठ संस्कृत में है। इसके ट्रांसलेशन पर किसी ने आप!त्ति नहीं की है, सिर्फ इसकी जगह को लेकर आपत्ति है।

शिलालेखों पर उल्लेख साकेत मंडल में बने मंदिर से है और यह राम के जन्म का स्थान है। 12वीं शताब्दी में साकेत मंडला का राजा गोविंदा चंद्रा था, उस वक्त अयोध्या उसकी राजधानी थी। यहां विष्णु हरि का बहुत बड़ा मंदिर था। ये स्लैब पांचजन्य के एक रिपोर्टर ने देखा था।

रिपोर्ट में लिखा है कि ढहाने के दौरान मैंने शिलाएं गि!रती हुई देखीं थीं तब कुछ पुलिस वाले उन प!त्थरों को उठा कर रामकथा कुंज ले गए। ये शिलाएं 4 फुट x2 फुट आकार वाली थीं। वो शिलालेख राज्य पुरातत्व विभाग के अभिरक्षा (कस्टडी) में है।

वैद्यनाथन ने कहा, खुदाई से मिले अवशेषों की वैज्ञानिक प!ड़ताल के बाद ASI की रिपोर्ट, मौके से मिले सबूत से कोई शं!का या वि!वाद की गुं!जाइश नहीं रह जाती। ये सब 11वीं सदी के दौरान निर्मित हैं।

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